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दिल्ली हाईकोर्ट: बहू को प्रताड़ित करने के लिए ससुर जिम्मेदार नहीं
दिल्ली उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि घरेलू हिंसा कानून के तहत ससुर अपने बेटे को नियंत्रित न करने के लिए जवाबदेह नहीं हैं। न्यायालय ने माना कि परिवार के किसी सदस्य पर अन्य सदस्य के कृत्यों के लिए अपने आप में दायित्व नहीं लगाया जा सकता।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय में स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ससुर अपने बेटे को नियंत्रित न करने के कारण स्वचालित रूप से दोषी नहीं माने जा सकते। यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां पति द्वारा की गई हिंसा के लिए अन्य परिवार सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
न्यायालय के अनुसार, किसी परिवार के सदस्य के कार्यों के लिए दूसरे सदस्य को सीधे दायित्वशील नहीं ठहराया जा सकता। घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, केवल वही व्यक्ति जिम्मेदार हो सकते हैं जिन्होंने सीधे हिंसा की हो या उसमें सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई हो। ससुर की ओर से निष्क्रिय होना या पुत्र को नियंत्रित न करना स्वयं में कानूनी दायित्व का आधार नहीं बनता।
यह निर्णय घरेलू हिंसा के मामलों में कानूनी जिम्मेदारी की सीमाएं निर्धारित करते हुए दिया गया है। न्यायालय का यह स्टैंड यह सुनिश्चित करता है कि पारिवारिक सदस्यों को केवल व्यक्तिगत कृत्यों के लिए ही दोषी ठहराया जाए, न कि परिवार के अन्य सदस्यों की क्रियाओं के लिए। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा के शिकार को न्याय मिलना चाहिए, परंतु कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट और न्यायसंगत सीमाओं के अंतर्गत संचालित होना चाहिए।