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प्रसव अवकाश के कारण नौकरी या करियर को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए: दिल्ली HC

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को छह महीने में कार्यस्थल पर महिलाओं के संरक्षण के नियम बनाने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि प्रसव अवकाश के दौरान महिलाओं की नौकरी की सुरक्षा और करियर की संभावनाएं बरकरार रहनी चाहिए।

LSN India · 2 September 2026

प्रसव अवकाश के कारण नौकरी या करियर को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए: दिल्ली HC

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि प्रसव अवकाश लेने वाली महिलाओं को उनकी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता और न ही इससे उनके करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचना चाहिए। न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह छह महीने की अवधि में कार्यस्थल पर आवास सुविधाएं और महिलाओं के संरक्षण से संबंधित नियम तथा योजनाएं बनाए।

न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि सरकार को महिलाओं के पद और स्थिति की सुरक्षा, स्तनपान सहायता प्रदान करने और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने संबंधी नियम बनाने हैं। यह फैसला गर्भवती महिलाओं और प्रसव अवकाश पर जाने वाली महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

दिल्ली उच्च न्यायालय का यह निर्णय भारतीय कार्यस्थलों में महिलाओं के साथ भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। कानून के अनुसार, प्रसव अवकाश की अवधि के दौरान किसी भी महिला कर्मचारी को उसके पद से हटाया नहीं जा सकता या उसके करियर विकास में बाधा नहीं डाली जा सकती।

यह निर्देश केंद्र सरकार के सभी विभागों और एजेंसियों के लिए लागू होगा। साथ ही, न्यायालय ने निजी क्षेत्र की कंपनियों से भी अपेक्षा की है कि वे महिला कर्मचारियों के लिए समान सुरक्षा उपायों को अपनाएं।