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विवाह विवाद से पूरे परिवार को फंसाना न्यायसंगत नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि विवाहित जोड़े के बीच मतभेद के आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है। न्यायालय ने माना कि आपराधिक मुकदमे का असर व्यक्ति की प्रतिष्ठा, आजीविका और पारिवारिक जीवन तक जाता है।

LSN India · 5 November 2026

विवाह विवाद से पूरे परिवार को फंसाना न्यायसंगत नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि विवाहित दंपति के बीच के विवादों को आधार बनाकर पूरे परिवार को आपराधिक कार्रवाई के दायरे में नहीं लाया जा सकता। न्यायालय ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत विवाद और पारिवारिक कलह से उत्पन्न आरोपों में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

न्यायाधीश ने कहा कि आपराधिक मुकदमे केवल अदालत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके परिणाम व्यक्ति की प्रतिष्ठा, रोजगार और पारिवारिक सुख को प्रभावित करते हैं। यह टिप्पणी ऐसे मामलों में की गई जहां एक विवाहित महिला के आरोपों के आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया था।

न्यायालय ने माना कि विवाह संबंधी विवादों में किए गए आरोपों की पड़ताल करते समय न्यायिक प्रक्रिया में परिपक्वता और समझदारी दिखानी चाहिए। बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी को आपराधिक कार्रवाई में फंसाना न्याय प्रणाली की गंभीर विफलता है।

यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भी परिवार के अन्य सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। न्यायालय ने कहा कि सरकार के कानून प्रवर्तन तंत्र को तथ्यों की गहन जांच के बाद ही कार्रवाई करनी चाहिए, न कि किसी एक पक्ष के आरोपों पर तुरंत विश्वास करना चाहिए।