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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर प्रतिबंध, अभिजीत डिप्के का आरोप
भारतीय जनता पार्टी के नेता अभिजीत डिप्के ने दिल्ली में चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन पर लगाए गए असामान्य प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की घटना को 'पूर्व नियोजित षड्यंत्र' बताया है।
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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिजीत डिप्के ने केंद्रीय चुनाव आयोग पर तीव्र आक्षेप करते हुए कहा है कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए जो असाधारण प्रतिबंध लगाए गए हैं, वह लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। डिप्के के अनुसार, मतदाता सूची से 13 करोड़ नामों को हटाए जाने की घटना एक व्यवस्थित कार्रवाई है जिसका उद्देश्य जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना है।
चुनाव आयोग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में प्रदर्शन करने से रोकने के लिए जो प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं, उन पर भी डिप्के ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि यह दमनकारी रवैया संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध है और इससे तानाशाही की गंध आती है।
डिप्के का मानना है कि मतदाता सूची में ऐसे बड़े पैमाने पर नामों को हटाने का कोई वैध कारण नहीं दिया गया है। वे इस पूरी घटना को चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक गंभीर सवाल के रूप में देख रहे हैं।