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दिल्ली में वाहन प्रतिबंध से परिवहन क्षेत्र को चिंता, पायलट प्रकल्प की मांग
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए नवंबर से वाहनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर परिवहन उद्योग चिंतित है। ट्रांसपोर्टरों का संगठन सरकार से पहले एक पायलट परियोजना चलाने की अपील कर रहा है।
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दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार 1 नवंबर 2026 से वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। यह कदम राजधानी की खराब हवा की गुणवत्ता को नियंत्रित करने का हिस्सा है, लेकिन परिवहन क्षेत्र इसके आर्थिक परिणामों से जूझ रहा है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट्स कांग्रेस (AIMGTA) ने इस प्रस्तावित नीति के खिलाफ अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए कहा है कि ऐसी व्यापक पाबंदियों को लागू करने से पहले एक सीमित पायलट प्रकल्प चलाया जाना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि पहले कम से कम 15 दिन का परीक्षण काल रखा जाए ताकि प्रतिबंधों के वास्तविक प्रभाव का सही आकलन किया जा सके।
परिवहन क्षेत्र को आशंका है कि वाहन प्रतिबंध से जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, औद्योगिक गतिविधियां बाधित होंगी और रोजगार का नुकसान होगा। AIMGTA का तर्क है कि व्यापक प्रतिबंध लागू करने से पहले उनके दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों की पूरी समझदारी होनी चाहिए।
सरकारी अधिकारियों का ध्यान प्रदूषण नियंत्रण की आवश्यकता पर केंद्रित है, लेकिन परिवहन उद्योग की ओर से बढ़ता दबाव इंगित करता है कि इस नीति को क्रियान्वित करने से पहले सभी पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता है।