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जंतर मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटा, युवा कार्यकर्ता करेंगे पूरे देश में विरोध
दिल्ली के जंतर मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल का दर्जा रद्द किए जाने से युवा नेतृत्व वाली राजनीतिक टीम को झटका लगा है। कॉकरोच जंता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिप्के का कहना है कि अब पूरे देश को ही जंतर मंतर बना दिया जाएगा।
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दिल्ली के प्रतिष्ठित जंतर मंतर को सरकार द्वारा आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारे में तनाव बढ़ गया है। यह निर्णय उस समय आया है जब जून महीने से यह स्थान युवा-केंद्रित विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ था।
इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जंता पार्टी कर रही है, जिसकी स्थापना अभिजीत डिप्के ने की थी। डिप्के के अनुसार, इस फैसले से आंदोलन की गति कमजोर नहीं होगी। उन्होंने कहा है कि यदि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल नहीं माना जाएगा, तो पूरे भारत देश को ही प्रदर्शन का केंद्र बनाया जाएगा।
जंतर मंतर दशकों से दिल्ली में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का प्रतीक रहा है। इस बार जून से शुरू हुए प्रदर्शन युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी के लिए विशेष रूप से चिन्हित थे। सरकार का यह कदम इसी सक्रिय आंदोलन के जवाब में माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे प्रतिबंधात्मक कदम अक्सर आंदोलनों को और अधिक विकेंद्रीकृत और व्यापक बनाने का कारण बनते हैं। डिप्के का बयान इसी संभावना को दर्शाता है कि युवा नेतृत्व अब पारंपरिक विरोध स्थलों के बजाय अन्य रणनीतियों की ओर मुड़ सकता है।