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दिल्ली में मतदाता अधिकार के लिए दस्तावेजों का संघर्ष

राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूची में नाम बरकरार रखने के लिए हजारों नागरिकों को बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वर्षों तक मतदान करने वाले लोगों को भी अपनी योग्यता साबित करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

LSN India · 20 September 2026

दिल्ली में मतदाता अधिकार के लिए दस्तावेजों का संघर्ष

दिल्ली के विभिन्न एसआईआर (मतदाता सत्यापन) सुनवाई केंद्रों में नागरिकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। घंटों का इंतजार करने वाले मतदाताओं को बार-बार अपनी पहचान साबित करने के लिए कई दस्तावेज लाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में तो वे लोग भी इस प्रक्रिया से गुजर रहे हैं जो दशकों से मतदान कर रहे हैं।

सूचना और दस्तावेजों के भ्रामक नियमों के कारण यह प्रक्रिया अत्यधिक जटिल बनी हुई है। मतदाता पंजीकरण प्राधिकारी और आवेदकों के बीच संचार में कमी के कारण कई लोगों को बार-बार केंद्र जाना पड़ रहा है। कुछ मामलों में तो पहले से मान्य दस्तावेजों को भी फिर से प्रस्तुत करने की मांग की जा रही है।

इस प्रक्रिया का सबसे अधिक दबाव समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। गरीब और हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के पास अक्सर संपूर्ण दस्तावेज नहीं होते। उनके लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना समय और धन दोनों की बर्बादी का कारण बन रहा है।

मतदान का अधिकार भारतीय लोकतंत्र की नींव है, लेकिन इस सत्यापन प्रक्रिया ने लाखों योग्य नागरिकों के लिए मतदान करना कठिन बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि प्रत्येक नागरिक को अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करने में बाधा का सामना न करना पड़े।