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लोकतंत्र भारत के आर्थिक सुधारों को टिकाऊ बनाता है: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा है कि सहमति बनाने की प्रक्रिया निर्णय को धीमा कर सकती है, लेकिन यह सुधारों को दीर्घकालीन और टिकाऊ बनाती है। उन्होंने चेताया कि विकास के लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए।
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भारत के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने देश के आर्थिक सुधारों की स्थायित्व पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि भले ही सहमति निर्माण की प्रक्रिया कभी-कभी निर्णय लेने में देरी कर सकती है, लेकिन यह दृष्टिकोण सुधारों को लंबे समय तक संरक्षित रखता है।
राधाकृष्णन के अनुसार, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था विभिन्न हितधारकों को शामिल करते हुए आर्थिक नीतियों को आकार देती है। इससे सुधारों को व्यापक सामाजिक स्वीकृति मिलती है और उन्हें राजनीतिक परिवर्तन के आघातों से बचाता है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक वृद्धि के लाभ समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेताया कि यदि सुधारों का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रहता है, तो इससे सामाजिक असंतोष और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।
भारत के आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए राधाकृष्णन की बातें देश की विकास नीति निर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। उनका मत है कि समावेशी विकास ही भारत की आर्थिक प्रगति को वास्तव में सार्थक और स्थिर बना सकता है।