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मैसूर के बादानावालु में गांधी-युग की खादी इकाई को तोड़ने से गांधीवादियों में नाराजगी

मैसूर के बादानावालु खादी और ग्रामोद्योग केंद्र की सदी पुरानी इमारतों को गिराए जाने की खबर गांधीवादी कार्यकर्ताओं को नाराज कर गई है। महात्मा गांधी ने 1927 और 1932 में इस केंद्र का दौरा किया था।

LSN India · 24 August 2026

मैसूर के बादानावालु में गांधी-युग की खादी इकाई को तोड़ने से गांधीवादियों में नाराजगी

मैसूर जिले के बादानावालु क्षेत्र में स्थित खादी और ग्रामोद्योग केंद्र की ऐतिहासिक इमारतों को तोड़ने की कार्रवाई से गांधीवादी और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं में विरोध की लहर उठी है। यह केंद्र स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है, जहां महात्मा गांधी ने 1927 और पुनः 1932 में अपनी यात्रा की थी।

प्रशासकीय अधिकारियों का तर्क है कि इन संरचनाओं की स्थिति बहुत खस्ता है और उन्हें मरम्मत के लिए संरक्षित नहीं रखा जा सकता। हालांकि, इतिहास संरक्षण के समर्थकों का मानना है कि इन इमारतों का राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व है और इन्हें विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए था।

गांधी के जीवन और कार्यों से जुड़े स्थलों के संरक्षण को लेकर यह विवाद अब सवालों का सामना कर रहा है कि क्या पुरानी इमारतों की गिरावट को मरम्मत के जरिए रोका जा सकता था। स्थानीय समुदाय और ग्रामीण विकास से संबंधित संगठन इस निर्णय की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।

खादी केंद्र भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन के दौरान हाथ से बुनी गई कपड़ों के उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। गांधी का यह क्षेत्र से जुड़ाव आजादी के बाद भी ग्रामीण कारीगरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।