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डेंगू में बुखार उतरने के बाद भी कमजोरी क्यों? चौथे-छठे दिन सावधानी जरूरी
डेंगू संक्रमण के दौरान बुखार उतरने के बाद भी रोगी में गंभीर कमजोरी आ सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि संक्रमण के चौथे से छठे दिन का समय सबसे खतरनाक होता है।
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डेंगू संक्रमण में बुखार के उतरने के बाद रोगी की स्थिति में भले ही सुधार दिखाई दे, लेकिन यह अवधि चिकित्सकीय दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील मानी जाती है। संक्रमण के चौथे से छठे दिन के बीच रोगी में अत्यधिक कमजोरी, थकान और शारीरिक दुर्बलता देखी जाती है, जो गंभीर जटिलताओं का संकेत हो सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवधि में डेंगू वायरस शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। बुखार कम होने के बाद भी वायरस की सक्रियता जारी रहती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है। इसी कारण से रोगी को अत्यधिक कमजोरी और सामान्य कार्यों को करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
इस गंभीर अवधि में रोगी को पूर्ण विश्राम, उचित पोषण और नियमित चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता होती है। रक्त प्लेटलेट्स में गिरावट, रक्तस्राव और अन्य गंभीर लक्षणों पर सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि सांस लेने में परेशानी, तेज पेट दर्द या निरंतर उल्टियां आएं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डेंगू के रोगी को इस अवस्था में भरपूर तरल पदार्थ, विटामिन युक्त भोजन और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करना चाहिए। नियमित रक्त परीक्षण और चिकित्सक के परामर्श से ही इस जटिल चरण से सुरक्षित रूप से गुजारा जा सकता है।