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नियामकीय बदलावों से डेरिवेटिव कारोबार प्रभावित, अगस्त में दैनिक अनुबंध 23% गिरे

भारत में डेरिवेटिव बाजार में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जिसमें अगस्त महीने में दैनिक अनुबंधों में 23 प्रतिशत की कमी आई। स्टॉक ट्रांजैक्शन टैक्स और प्रतिभूति आवश्यकताओं में वृद्धि व्यापारियों के लिए चुनौती बन गई है।

LSN India · 14 September 2026

नियामकीय बदलावों से डेरिवेटिव कारोबार प्रभावित, अगस्त में दैनिक अनुबंध 23% गिरे

नियामकीय नीतियों में हाल ही में किए गए बदलाव भारतीय डेरिवेटिव बाजार में तेजी से मंदी ला रहे हैं। अगस्त 2024 में दैनिक अनुबंधों की संख्या पिछली अवधि की तुलना में 23 प्रतिशत गिरी है, जो बाजार में व्यापारिक गतिविधियों में स्पष्ट संकुचन को दर्शाता है।

इस गिरावट का प्रमुख कारण स्टॉक ट्रांजैक्शन टैक्स अर्थात एसटीटी में की गई वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, व्यापारियों को अधिक मार्जिन और प्रतिभूति आवश्यकताओं का भी सामना करना पड़ रहा है। ये उपाय मुख्यतः बाजार में जोखिम को नियंत्रित करने के लिए किए गए हैं, लेकिन इनका सीधा असर निवेशकों की व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा है।

विश्लेषकों का मानना है कि ये नियामकीय बदलाव अल्पकालिक रूप से बाजार में तरलता कम कर रहे हैं। डेरिवेटिव बाजार में भाग लेने वाले संस्थागत और खुदरा निवेशकों दोनों को अपनी व्यापारिक रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। बाजार सहभागियों का अनुमान है कि यदि ये नीतियां लंबे समय तक लागू रहीं तो भारतीय डेरिवेटिव बाजार की वैश्विक प्रतिस्पर्धिता प्रभावित हो सकती है।

नियामकीय प्राधिकरण यह दावा करते हैं कि ये कदम बाजार की स्थिरता और निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, बाजार सहभागियों का कहना है कि नीतियों को बनाते समय व्यापारिक व्यवहार्यता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था।