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13 साल के अध्ययन में कंगारू चूहों की रेगिस्तान वनस्पति में महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई
वैज्ञानिकों के 13 साल लंबे शोध से पता चला है कि रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र में कंगारू चूहों की भूमिका कितनी अहम है। इन कृंतकों की अनुपस्थिति में घास की प्रजातियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
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एक दीर्घकालीन अनुसंधान परियोजना में शोधकर्ताओं ने रेगिस्तानी इलाकों से कंगारू चूहों को हटाकर उनकी पारिस्थितिकीय महत्ता को समझने का प्रयास किया। इस 13 वर्षीय अध्ययन में वैज्ञानिकों ने देखा कि इन चूहों की अनुपस्थिति में दो विशिष्ट घास प्रजातियों की संख्या में नाटकीय वृद्धि हुई।
अनुसंधान से पता चला कि कंगारू चूहे मिट्टी को खोदकर और बीजों को खाकर वनस्पति के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखते हैं। इन चूहों की अनुपस्थिति में मिट्टी में बेहतर स्थिरता मिली और बीजों की अधिक संख्या अंकुरित हुई, जिससे घास का घनत्व बढ़ा।
रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र पर इस परिवर्तन का असर अन्य जानवरों पर भी पड़ा। अन्य कृंतकों और शिकारी पक्षियों के व्यवहार में बदलाव देखा गया, जो कुल मिलाकर रेगिस्तानी समुदाय की जटिल खाद्य श्रृंखला को दर्शाता है।
यह अध्ययन दर्शाता है कि कंगारू चूहे जैसी छोटी प्रजातियां भी रेगिस्तानी वनस्पति समुदाय की गतिशीलता में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी शोध परियोजनाएं जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं।