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विकसित देशों का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत से छह गुना अधिक: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित राष्ट्रों की प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में छह गुना अधिक है। उन्होंने विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी का अधिक न्यायसंगत आकलन की मांग की।
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प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकसित और विकासशील देशों के बीच असमान दायित्व को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के आधार पर देखें तो विकसित राष्ट्र भारत से छह गुना अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं।
मोदी का यह कथन अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता में भारत की स्थिति को मजबूत करता है, जहां विकासशील देश ऐतिहासिक और वर्तमान उत्सर्जन के आधार पर विकसित देशों से अधिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। भारत का तर्क है कि विकसित राष्ट्रों ने औद्योगीकरण के दौरान वातावरण में भारी मात्रा में कार्बन डाला है।
प्रधानमंत्री के इस बयान का उद्देश्य यह रेखांकित करना है कि भारत जैसे विकासशील देशों को जलवायु संकट के समाधान में अपनी आर्थिक प्रगति से समझौता किए बिना योगदान देना चाहिए। वे कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों में विकसित देशों की वास्तविक भूमिका को स्वीकार करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने और कार्बन तटस्थता की ओर काम करने की प्रतिबद्धता दिखाई है, लेकिन साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक जलवायु जिम्मेदारी का बोझ न्यायसंगत तरीके से बंटा जाए।