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पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ विकास जरूरी: बी.एस. झा
भारतीय नीति विशेषज्ञ बी.एस. झा ने कहा है कि देश के विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्यावरणीय संरक्षण के साथ समन्वय स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार आर्थिक प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
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झा का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देशों के समक्ष बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाते हुए पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। वह दोनों उद्देश्यों को समान महत्व देने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन विकास केवल तभी संभव है जब हम अपनी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखें। प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समस्याएं पैदा करता है।
झा के अनुसार, सरकार, उद्योग और नागरिक समाज को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो आर्थिक वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों को सुनिश्चित करें। इस संदर्भ में नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और टिकाऊ कृषि पद्धतियों में निवेश अत्यावश्यक है।
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों को शामिल करना चाहिए ताकि उन्हें अपने परिवेश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास हो। झा के मुताबिक, जब तक आम जनता पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध नहीं होगी, तब तक कोई भी सरकारी पहल पूरी तरह सफल नहीं हो सकती।