LSN News › India

World · India Bureau

नवरात्र तृतीय दिवस: मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और विधान

नवरात्र उत्सव के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को समर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इनकी आराधना से भक्तों में साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता का संचार होता है।

LSN India · 12 October 2026

नवरात्र तृतीय दिवस: मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और विधान

नवरात्र के तीसरे दिन को दुर्गा पूजा परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है, जो देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप माने जाते हैं। देवी के मस्तक पर अर्धचंद्र की शोभा विशेष रूप से दर्शायी जाती है, जिससे उन्हें चंद्रघंटा नाम मिला है।

पौराणिक विवरणों के अनुसार, देवी चंद्रघंटा के दस हाथों में विभिन्न दिव्य अस्त्र और शस्त्र धारण किए हुए हैं। इस रूप में उनका उपस्थिति शांति और शक्ति दोनों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले भक्त इस दिन विशेष पूजन अनुष्ठान का आयोजन करते हैं।

आध्यात्मिक परंपराओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की सच्ची आराधना से भक्तों के मन में साहस, दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास का विकास होता है। कहा जाता है कि इनकी कृपा से व्यक्ति अपने भय को जीतने की शक्ति पाता है। नवरात्र के इस पावन दिन पर भक्त देवी को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं।

भारतीय परंपरा में नवरात्र के नौ दिनों को देवी के नौ विभिन्न रूपों की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। प्रत्येक दिन की पूजा विधि और महत्व में अलग-अलग विशेषताएं हैं। तीसरे दिन की पूजा विशेषकर युवाओं और साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो अपने जीवन में आध्यात्मिक विकास चाहते हैं।