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जन्माष्टमी पर निशीता काल में कृष्ण जन्म की विधि और पंचामृत स्नान
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर निशीता काल के दौरान खीरे से भगवान का जन्म कराने और पंचामृत स्नान की सही विधि के बारे में जानकारी।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त निशीता काल के दौरान भगवान का जन्म कराने की परंपरागत विधि का पालन करते हैं। इस वर्ष निशीता काल रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है।
इस शुभ काल में खीरे का उपयोग करके भगवान कृष्ण के जन्म को दर्शाया जाता है। परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार, खीरे को सजाकर और विधिवत रूप से तैयार करके भगवान का जन्म कराया जाता है। इसके बाद देवता को पंचामृत से स्नान कराना सामान्य प्रथा है।
पंचामृत स्नान विधि में दूध, दही, घी, शहद और चीनी को मिलाकर तैयार किया जाता है। इस मिश्रण से देवता को नहलाने के बाद शुद्ध जल से धुलवाया जाता है और फिर फूलों से सजाया जाता है। इसके अनुसार, भक्त जन्माष्टमी की रात को इन विधियों का पालन करके पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निशीता काल में की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है। भक्त इस समय भगवान से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं और परिवार की कुशलता के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।