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नवरात्रि ब्रह्मोत्सव में भक्तों ने देखा भगवान मलयप्पा स्वामी का भव्य रथ
नवरात्रि ब्रह्मोत्सव के चौथे दिन भगवान मलयप्पा स्वामी अपनी दोनों पत्नियों के साथ कल्पवृक्ष वाहनम पर सवार हुए। सुबह बकासुर वध अलंकार में और रात को सर्वभूपाल वाहनम पर भगवान ने अपनी संप्रभुता का प्रदर्शन किया।
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दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक में नवरात्रि ब्रह्मोत्सव का आयोजन धूमधाम से चल रहा है। इस वर्ष के उत्सव के चौथे दिन भगवान मलयप्पा स्वामी भक्तों के सामने भव्य रूप में प्रकट हुए। देवताओं के राजा को उनकी दोनों पत्नियों के साथ विभिन्न वाहनों पर सजाया गया।
सुबह के समय भगवान को बकासुर वध अलंकार में सजाया गया। इस अलंकार में भगवान ने राक्षस बकासुर का वध करने की घटना को दर्शाया। भक्तों की भीड़ को देखकर लगा कि वे इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए कितने लालायित थे।
रात के समय भगवान मलयप्पा स्वामी कल्पवृक्ष वाहनम पर सवार होकर निकले। इस वाहन पर भगवान ने ब्रह्मांड के रक्षक और सर्वोच्च शासक के रूप में अपनी भूमिका का प्रदर्शन किया। सर्वभूपाल वाहनम भगवान की संप्रभुता और सार्वभौमिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्रि ब्रह्मोत्सव का यह उत्सव प्रतिवर्ष हजारों भक्तों को आकर्षित करता है। इस अवधि में विभिन्न दिनों पर भगवान को अलग-अलग रूपों और वाहनों में प्रदर्शित किया जाता है। प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व और धार्मिक मायने होते हैं।