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नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को समर्पित, जानें पूजन की परंपरा
नवरात्रि पर्व के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माता की सात भुजाओं में विभिन्न दिव्य वस्तुएं सुशोभित हैं जो शक्ति और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती हैं।
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नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की आराधना की परंपरा भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित है। शास्त्रों के अनुसार, मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचना का कारण माना जाता है और उनके नाम का अर्थ ब्रह्मांड को जन्म देने वाली शक्ति से संबंधित है।
मां कूष्मांडा की मूर्ति में सात भुजाएं दर्शाई जाती हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल और अमृत से भरा कलश सुशोभित हैं। इसके अतिरिक्त, देवी के हाथों में चक्र और गदा भी दर्शाई जाती है। ये सभी वस्तुएं दिव्य शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं।
मां कूष्मांडा की आठवीं भुजा में जपमाला दर्शाई जाती है, जिसे सभी सिद्धियों और मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन माता की पूजा करने से आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।
नवरात्रि के इस महत्वपूर्ण दिन पर भक्त मां कूष्मांडा को फूल, प्रसाद और अन्य परंपरागत वस्तुएं समर्पित करते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई आराधना से परिवार में सुख, समृद्धि और कल्याण का आगमन होता है।