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धनतेरस पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन: शुभ मुहूर्त और विधि
धनतेरस के अवसर पर देशभर में लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की परंपरा है। पूजा का सही समय, आवश्यक सामग्री और क्रय-विक्रय के लिए शुभ घड़ी जानें।
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धनतेरस का पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो दिवाली समारोह की शुरुआत करता है। इस दिन घरों में लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिसे समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। परिवार के सदस्यों को इस पूजा में शामिल होने के लिए घर पर बैठे रहना चाहिए।
पूजा के लिए आमतौर पर मिट्टी के दीये, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और फल जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, घर के पूर्व या उत्तर दिशा में पूजा स्थल स्थापित करना अनुकूल माना जाता है। परिवार के बड़े सदस्यों का आशीर्वाद लेना भी इस विधि का महत्वपूर्ण अंग है।
धनतेरस की शाम को नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। व्यापारिक समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे नई शुरुआत के लिए मुहूर्त माना जाता है। हालांकि, खरीदारी का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पूजन करने से घर में धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि आती है। पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करना भी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।