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धनतेरस पर सोना-चांदी में निवेश 2005 के बाद से चौगुना बढ़ा
कोटक नियो के विश्लेषण के अनुसार पिछले दो दशकों में धातुओं में नियमित निवेश से उल्लेखनीय संपत्ति सृजन संभव हुआ है। बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना और चांदी में सामान्य क्रय रणनीति ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिलाया।
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पिछले इक्कीस वर्षों में सोने और चांदी में निवेश करने वालों को उल्लेखनीय रिटर्न मिला है। कोटक नियो के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 2005 से लेकर वर्तमान तक इन कीमती धातुओं का मूल्य लगभग चार गुना तक बढ़ गया है।
इस अवधि में हालांकि वैश्विक और घरेलू बाजार कई चक्रों से गुजरे हैं और कई आर्थिक उथल-पुथल देखी गई हैं। इसके बावजूद धातुओं के मूल्य में सतत वृद्धि का रुझान रहा है जो दीर्घकालीन निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हुआ।
धनतेरस के अवसर पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा भारतीय समाज में गहरी जड़ें रखती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि निवेशक नियमित अंतराल पर छोटी-छोटी मात्रा में इन धातुओं में निवेश करते रहें तो समय के साथ महत्वपूर्ण संपत्ति जमा हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सोना-चांदी जैसी परंपरागत संपत्तियां दीर्घमेयादी निवेश पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहती हैं। नियमित निवेश की रणनीति अपनाने से बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सकता है।