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ईरान संकट से डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर, राहत दूर दिख रही है
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बीच डीजल की कीमतें 2022 के स्तर तक पहुंच गई हैं और आगामी महीनों में और अधिक वृद्धि की आशंका है। भारत जैसे तेल आयातकारी देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक साबित हो रही है।
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ईरान के साथ तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए गणना करने पर अगस्त के अंत में डीजल की कीमत लगभग वैसी ही थी जैसी 2022 में थी, जबकि बाद के महीनों में यह और भी ऊपर जा सकती है।
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है जहां ईंधन की कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत को सीधे प्रभावित करती हैं। भारत में माल परिवहन, कृषि और विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्र डीजल पर अत्यधिक निर्भर हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार मध्य पूर्व में स्थिति के स्थिर होने तक कीमतों में कोई कमी की उम्मीद नहीं है। इस अवधि में तेल आयातकारी देशों को अपने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय सरकार और आरबीआई जैसी संस्थाएं इस स्थिति को निकटता से देख रही हैं क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतें समग्र मुद्रास्फीति दर को प्रभावित कर सकती हैं। अगले कुछ महीने तेल बाजार की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।