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डिजिटल मीडिया पुस्तक संस्कृति के लिए खतरा: मारुलसिद्धप्पा
दशहरा साहित्यिक आयोजन में प्रख्यात विद्वान मारुलसिद्धप्पा ने डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति से पारंपरिक पुस्तक संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है।
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दशहरा साहित्य समारोह के दौरान आयोजित एक गोष्ठी में मारुलसिद्धप्पा ने भारतीय साहित्य और ज्ञान परंपरा के लिए डिजिटल माध्यमों की बढ़ती मांग को एक गंभीर मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में स्मार्टफोन और इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से युवा पीढ़ी पुस्तकों से दूर हो रही है।
विद्वान के अनुसार, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सूचना की बहुलता के कारण गहन पढ़ने की परंपरा क्षीण हो रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुस्तकें केवल सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास का माध्यम हैं।
मारुलसिद्धप्पा ने भारतीय समाज में साहित्यिक मूल्यों को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा संस्थानों और पुस्तकालयों को इस चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।