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डिजिटल वित्त में खाई, महिलाओं की प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में भागीदारी सीमित
भारत की प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी न्यून बनी हुई है, जबकि बैंक खातों के मामले में लगभग समानता है। डिजिटल कौशल और ऋण सुविधा में व्याप्त अंतराल इस असमानता का मुख्य कारण बना हुआ है।
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भारत में प्लेटफॉर्म आधारित काम में महिलाओं की भागीदारी में सुधार न आने का मुख्य कारण डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच की कमी है। हालांकि बैंक खातों के संदर्भ में महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर लगभग समाप्त हो गया है, किंतु व्यावहारिक डिजिटल क्षमता और साख प्रदान करने में बड़ी खाई बनी हुई है।
इस कमजोरी के कारण महिलाएं ऑनलाइन बाजारों में आय के नए अवसरों से लाभ नहीं उठा पा रही हैं। डिजिटल लेनदेन करने की आत्मविश्वास की कमी और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने में कठिनाई प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में उनकी सक्रिय भागीदारी में बाधा डाल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को डिजिटल कौशल प्रशिक्षण और समावेशी ऋण नीतियों के माध्यम से सशक्त बनाना आवश्यक है। यदि इन अंतरालों को दूर किया जाए, तो भारत की प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में महिलाओं की सार्थक भागीदारी से आर्थिक वृद्धि में तेजी आ सकती है।
प्रौद्योगिकी और वित्त क्षेत्र के विकास के साथ, महिलाओं को डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों के प्रयोग में व्यावहारिक सहायता मिलना आवश्यक है। इससे न केवल व्यक्तिगत आय में वृद्धि होगी, बल्कि समाज में आर्थिक समानता की दिशा में भी प्रगति होगी।