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सितंबर तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर 12.12 ट्रिलियन रुपये
भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में तेजी देखी गई है, जो सितंबर के मध्य तक 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 12.12 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गए हैं। कॉर्पोरेट कर और स्टॉक ट्रांजेक्शन टैक्स की बढ़ोतरी इस वृद्धि का प्रमुख कारण रही है।
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वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के प्रत्यक्ष कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 17 सितंबर तक का आंकड़ा दिखाता है कि शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.12 ट्रिलियन रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलनीय अवधि के मुकाबले 13 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा सरकार के राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के प्रति आशावाद को दर्शाता है।
कॉर्पोरेट कर संग्रह और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में दर्ज की गई वृद्धि इस सकारात्मक प्रदर्शन को संचालित करने वाली मुख्य शक्तियां रही हैं। कॉर्पोरेट क्षेत्र की आय में सुधार और शेयर बाजार की गतिविधियों में वृद्धि के चलते ये दोनों प्रमुख कर स्रोत मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालांकि, कर मामलों में देश की वापसी राशि में भी तेजी देखी गई है। करदाताओं को लौटाई गई राशि में सालाना आधार पर उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो आयकर रिफंड प्रक्रिया की बेहतरी और अनुपालन स्तर को दर्शाती है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में यह प्रवृत्ति भारत की आर्थिक गतिविधि की मजबूती को इंगित करती है, विशेषकर कॉर्पोरेट लाभप्रदता और पूंजी बाजार सक्रियता के संदर्भ में। सरकार के लिए यह सकारात्मक विकास वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक साबित हो रहा है।