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निर्देशक चिदंबरम 'बालन' के जरिए पैन-इंडियन सिनेमा की परिभाषा को चुनौती देते हैं
निर्देशक चिदंबरम ने अपनी नई परियोजना 'बालन' के माध्यम से पैन-इंडियन फिल्मों की अवधारणा पर सवाल उठाए हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने इस फिल्म को बनाने के पीछे के कारणों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बात की है।
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निर्देशक चिदंबरम ने अपनी आने वाली परियोजना 'बालन' के बारे में एक विस्तृत साक्षात्कार में कहा कि वर्तमान समय में पैन-इंडियन सिनेमा की परिभाषा को फिर से समझने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म उन्हें इसलिए आकर्षित करती है क्योंकि इसमें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दर्शकों को जोड़ने की क्षमता है।
चिदंबरम के अनुसार, एक सफल पैन-इंडियन फिल्म बनाने के लिए केवल बड़ा बजट और प्रसिद्ध कलाकार होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि कहानी की सार्वभौमिकता और विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ही असली कसौटी है। इस परियोजना को लेकर उनका दृष्टिकोण परंपरागत बॉलीवुड मॉडल से हटकर है।
निर्देशक ने भविष्य की अपनी योजनाओं के बारे में भी बात की और कहा कि वे ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो भारतीय सिनेमा को नई दिशा दें। उनका मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं की शक्ति को स्वीकार करते हुए भी राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचना संभव है। 'बालन' के माध्यम से वे इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे हैं।