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1935 में राष्ट्रीय पार्क के लिए बेदख़ल परिवार का मुआवज़ा कभी नहीं निकला
वर्जीनिया के एक आदमी को शेनान्दोह राष्ट्रीय पार्क के निर्माण के लिए जबरन अपनी जमीन से हटाया गया था। 1935 में उसके परिवार को निकाला गया, लेकिन उसने अपना मुआवज़ा कभी नहीं लिया।
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वर्जीनिया के शेनान्दोह राष्ट्रीय पार्क के निर्माण के दौरान सैकड़ों परिवारों को उनकी जमीन से बेदख़ल किया गया। इन परिवारों में मेलांथन क्लिसर और उनका परिवार भी शामिल था। क्लिसर के पास यूएस 211 के किनारे 46 एकड़ जमीन थी, जहां वह एक पेट्रोल पंप भी चलाते थे।
अक्टूबर 1935 में, स्थानीय शेरिफ और उनके सहायकों ने क्लिसर को हथकड़ी लगाई और परिवार की सभी चीजों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद उनके घर को सील कर दिया गया। यह अधिग्रहण प्रक्रिया 1930 के दशक में ब्लू रिज पर्वतमाला से सैकड़ों परिवारों को विस्थापित करने का हिस्सा थी।
राष्ट्रीय पार्क के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की यह प्रक्रिया बेहद विवादास्पद रही। हालांकि सरकार द्वारा बेदख़ल किए गए परिवारों को मुआवज़ा दिया जाना था, लेकिन क्लिसर का मामला असामान्य रहा। उन्होंने अपना भुगतान कभी नहीं लिया, जो इस ऐतिहासिक विस्थापन के दौरान आई जटिलताओं को दर्शाता है।
शेनान्दोह राष्ट्रीय पार्क का निर्माण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा, लेकिन इसकी कीमत स्थानीय समुदायों को भारी पड़ी। क्लिसर का मामला उस कालखंड में जमीन अधिग्रहण नीतियों के दुष्प्रभावों का एक ऐतिहासिक उदाहरण बना हुआ है।