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लोकतंत्र की नींव है असहमति: कानूनी विशेषज्ञ
प्रमुख कानूनी विद्वान मोहन गोपाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों पर बढ़ते हमले लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने इन प्रवृत्तियों के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध की मांग की।
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भारत के एक शीर्ष कानूनी विशेषज्ञ ने कहा है कि असहमति और आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला हैं। मोहन गोपाल ने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों पर बढ़ते प्रतिबंध एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संकेत हैं।
गोपाल के अनुसार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना का अधिकार और शांतिपूर्ण सभा करने की स्वतंत्रता पर लगाए जा रहे प्रतिबंध लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि ये कदम राज्य में बढ़ती सत्तावादी प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं।
विद्वान ने सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से आह्वान किया कि वे नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने माना कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आलोचनात्मक विचारों और विरोधी मतों को स्वीकार करना आवश्यक है।
गोपाल का मानना है कि अनुच्छेद 19 के तहत दिए गए अधिकारों की रक्षा करना भारतीय संविधान के मूल ढांचे को बरकरार रखने के लिए महत्वपूर्ण है।