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तमिलनाडु में दवा पैकेजिंग पर हिंदी के खिलाफ DMK का विरोध
तमिलनाडु DMK ने दवाइयों के कवर पर हिंदी भाषा के उपयोग पर आपत्ति जताई है। पार्टी का दावा है कि राज्य की त्रिभाषा नीति में केवल तमिल, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं को स्थान दिया जाना चाहिए।
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तमिलनाडु के सत्तारूढ़ DMK दल ने औषधि निर्माता कंपनियों द्वारा दवा पैकेजों पर हिंदी भाषा के उपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की है। पार्टी का मानना है कि राज्य की भाषा नीति में हिंदी को शामिल करना संविधान और तमिलनाडु की भाषायी परंपरा के विरुद्ध है।
DMK के नेतृत्व में गठित राज्य सरकार का तर्क है कि तमिलनाडु में तीन भाषाओं का ही उपयोग आवश्यक है - तमिल, अंग्रेजी और अन्य संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाएं। पार्टी का दावा है कि दवा पैकेजिंग पर हिंदी का अनावश्यक प्रयोग राज्य की भाषायी स्वायत्तता को प्रभावित करता है।
DMK ने केंद्रीय सत्ता से अपील की है कि दवा निर्माण में हिंदी के अनिवार्य उपयोग संबंधी किसी भी निर्देश को तुरंत वापस लिया जाए। पार्टी के अनुसार, ऐसी नीतियां तमिलनाडु जैसे राज्यों की भाषायी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाती हैं।
यह विवाद भारत में भाषायी नीतियों और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति केंद्र सरकार के दृष्टिकोण से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा है। तमिलनाडु में हिंदी को लेकर ऐतिहासिक संवेदनशीलता रही है और DMK पारंपरिक रूप से तमिल भाषा की सुरक्षा और प्रचार का समर्थक रहा है।