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चुनाव आयोग विरोधी प्रदर्शकों की गिरफ्तारी पर स्टालिन का तीखा हमला
डीएमके नेता एम.के. स्टालिन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को 'अघोषित आपातकाल' करार दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाले नागरिकों को हिरासत में लिया जा रहा है जबकि इसको नुकसान पहुंचाने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है।
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तमिलनाडु के प्रमुख राजनेता एम.के. स्टालिन ने देश की राजधानी में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर तीव्र आलोचना की है। डीएमके अध्यक्ष ने इस पुलिस कार्रवाई को राष्ट्रीय संस्थाओं में सेंध लगाने के समान बताया है।
स्टालिन के अनुसार, जो नागरिक लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरते हैं उन्हें निरुद्ध किया जा रहा है। इसके विपरीत, वे कहते हैं, जो तत्व इन संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास करते हैं, उन्हें संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने इसे संविधान के आदर्शों के विरुद्ध बताया है।
डीएमके नेता का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को नुकसान पहुंचता है।
स्टालिन की यह आलोचना उस समय आई है जब देश के विभिन्न हिस्सों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियां चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निरपेक्षता की मांग करती रही हैं।