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तीसरे मोर्चे की रणनीति? डीएमके नेता कनिमोझी की क्षेत्रीय दलों से मुलाकातें
डीएमके सांसद कनिमोझी की प्रमुख क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ मुलाकातें तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाओं को लेकर अटकलें बढ़ा रही हैं। कांग्रेस के साथ रिश्तों में तनाव की पृष्ठभूमि में ये संभेद राजनीतिक समीकरणों को नया आकार देने का संकेत दे रहे हैं।
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डीएमके सांसद कनिमोझी की क्षेत्रीय दलों के शीर्ष नेताओं से बढ़ती मुलाकातें राष्ट्रीय राजनीति में नए गठजोड़ की संभावना को लेकर चर्चा तेज कर दी हैं। कनिमोझी शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार से मिल चुकी हैं और अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनकी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ये पारस्परिक भेंटें मौजूदा राजनीतिक गठबंधनों से परे एक नए विकल्प के निर्माण की ओर इशारा कर सकती हैं। कनिमोझी की ये गतिविधियां उस समय सामने आ रही हैं जब डीएमके और कांग्रेस के बीच संबंधों में कटुता की खबरें आ रही हैं।
इन मुलाकातों का तात्कालिक राजनीतिक उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय दलों के बीच बढ़ता संपर्क आने वाले चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। देश की राजनीति में तीसरे मोर्चे की अवधारणा लंबे समय से मौजूद रही है और ऐसी गतिविधियां इसी चिंतन का हिस्सा माने जा रहे हैं।