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ब्लू-कट लेंस की कारगरता पर चिकित्सकों में सवाल, जानिए विशेषज्ञों की राय

डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बीच ब्लू-कट लेंस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या ये लेंस वाकई स्क्रीन से होने वाली आंखों की समस्याओं से बचाव करते हैं, इस पर चिकित्सकों के विचार अलग हैं।

LSN India · 1 October 2026

ब्लू-कट लेंस की कारगरता पर चिकित्सकों में सवाल, जानिए विशेषज्ञों की राय

ब्लू-कट लेंस को स्क्रीन से आने वाली नीली रोशनी से सुरक्षा प्रदान करने का दावा करते हुए बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है। बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से उन लोगों के बीच जो लंबे समय तक कंप्यूटर, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल डिवाइसों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इन लेंसों की वास्तविक प्रभावकारिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

सर गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. इकेडा लाल ने कहा है कि ब्लू-कट लेंस आंखों की थकान, जलन और ड्राई आई सिंड्रोम को रोकने में कितना प्रभावी है, यह अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है। स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताने से आंखों की समस्याएं होती हैं, लेकिन इसका कारण मुख्यतः नीली रोशनी ही है, यह धारणा वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल स्क्रीन से आंखों की समस्याओं से बचने के लिए ब्लू-कट लेंस के बजाय अन्य उपाय अधिक कारगर हो सकते हैं। इनमें नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना, सही रोशनी में काम करना, स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखना और 20-20-20 नियम का पालन करना शामिल है। इसके अलावा, आंखों को नियमित रूप से जांच करवाना भी आवश्यक है ताकि किसी गंभीर समस्या का समय रहते पता चल सके।