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सूखे से चावल और तूर दाल की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंचीं
लंबे समय तक बारिश न होने से देश में चावल और तूर दाल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची हैं। इससे घरों के बजट पर दबाव बढ़ गया है और होटल मालिकों को अपनी कीमतें बढ़ाने का विचार करना पड़ रहा है।
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देश भर में सूखे की स्थिति से प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू गई हैं। चावल और तूर दाल की कीमतें अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे आम परिवारों का मासिक खर्च बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले महीनों में मानसून की कमी का असर और भी गहरा होगा।
इस महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम घरों के बजट पर पड़ा है। दैनिक खाद्य सामग्री की कीमतें बढ़ने से परिवारों को अपने खर्च में कटौती करनी पड़ रही है। विशेषकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
होटल और खाद्य सेवा उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण होटेल मालिक अपने खाने की कीमतों में वृद्धि करने पर विचार कर रहे हैं। इससे खाद्य सेवा क्षेत्र का मुनाफा प्रभावित हो रहा है और उन्हें अपनी व्यावसायिक नीति में बदलाव करना पड़ रहा है।
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में स्थिति में सुधार के लिए समय पर बारिश और सरकारी हस्तक्षेप दोनों आवश्यक हैं। मौसम विभाग द्वारा अगले महीनों में मानसून की सामान्य गतिविधि की उम्मीद जताई जा रही है।