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सूखे से निपटना विकास की बड़ी चुनौती: पर्यावरण मंत्री
संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण सम्मेलन में भारतीय पर्यावरण मंत्री ने सूखे से लड़ने के लिए प्रौद्योगिकी और भूमि प्रबंधन नीतियों को मजबूत करने का आह्वान किया है।
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मंगोलिया में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण और सूखा सम्मेलन में भारतीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सूखा दक्षिण एशिया के विकास के लिए एक प्रमुख चुनौती बन गया है। उन्होंने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
मंत्री ने कहा कि भविष्य सूचक तकनीकों का इस्तेमाल करके और स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करके सूखे की चपेट में आने वाले क्षेत्रों में तैयारी बेहतर बनाई जा सकती है। उनके अनुसार, पूर्वानुमान और निगरानी व्यवस्था को और भी सुदृढ़ करने से आपातकाल की स्थिति से बचा जा सकता है।
यादव ने जोर दिया कि सक्रिय भूमि प्रबंधन नीतियों को लागू करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियों, वनीकरण और जल संरक्षण के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है, जो सूखे के असर को कम करने में सहायक साबित होगा।
मंत्री का मानना है कि सूखे से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों, किसानों और विभिन्न हितधारकों को इस प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हर स्तर पर सामूहिक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस जलवायु संकट से प्रभावी ढंग से लड़ा नहीं जा सकेगा।