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महात्मा गांधी की जन्मस्थली: दो संस्थाएं, एक विरासत
महात्मा गांधी की जन्मस्थली की देखभाल को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य सरकार की भूमिका अलग-अलग है। गांधी के जन्मस्थान और कीर्ति मंदिर स्मारक का प्रबंधन दो अलग संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
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महात्मा गांधी की जन्मस्थली और उनकी विरासत को संरक्षित रखने के लिए देश में दो अलग-अलग संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण गांधी के जन्मस्थान की देखभाल करता है, जबकि कीर्ति मंदिर स्मारक का प्रबंधन गुजरात राज्य सरकार द्वारा एक समिति के माध्यम से किया जाता है।
यह विभाजित व्यवस्था महात्मा गांधी से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण को लेकर देश की दीर्घकालीन नीति का हिस्सा है। राष्ट्रीय महत्व की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केंद्रीय पुरातत्व विभाग के जिम्मे होता है, जबकि क्षेत्रीय स्तर के स्मारकों और स्मृतियों की देखभाल राज्य स्तर पर की जाती है।
गांधी के जन्मस्थान को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक माना जाता है, जिस कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाता है। दूसरी ओर, कीर्ति मंदिर और अन्य संबंधित संरचनाओं की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है, जो एक विशेष समिति के जरिए इनका रखरखाव सुनिश्चित करता है।
इस द्वैध प्रबंधन व्यवस्था का उद्देश्य महात्मा गांधी की विरासत को विभिन्न स्तरों पर सुरक्षित रखना है। केंद्र और राज्य के बीच इस तरह की साझेदारी भारत के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का एक प्रमुख उदाहरण है।