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दुबई का जल संकट: रेगिस्तान में कैसे संभव है लाखों को पानी देना
संयुक्त अरब अमीरात के वित्तीय केंद्र दुबई में न तो कोई प्रमुख नदी है और न ही मीठे पानी के प्राकृतिक भंडार। फिर भी यहां निवास करने वाले लाखों लोगों को हर दिन पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
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दुबई की रेगिस्तानी भूगोल इसे एक कठिन चुनौती प्रस्तुत करती है। अरब प्रायद्वीप के इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा न्यूनतम है और भूजल भी अधिकांश स्थानों पर खारा है। ऐसे में स्थानीय जल संसाधन पूरी आबादी की मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हैं।
इस समस्या का समाधान दुबई ने समुद्री जल के विलवणीकरण (डिसैलिनेशन) में निवेश कर निकाला है। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए खारे समुद्री जल को पीने योग्य मीठे पानी में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा-गहन है, किंतु तेल समृद्ध अमीरात के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित हुई है।
दुबई में स्थित कई विलवणीकरण संयंत्र दिनभर काम करते हैं और शहर की जल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, भूमिगत जल भंडार और वर्षा जल संचयन भी जल प्रबंधन रणनीति का महत्वपूर्ण अंग हैं। इन तीनों स्रोतों को मिलाकर दुबई अपनी तीव्र विकास के बीच भी लाखों निवासियों को विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दृष्टिकोण न केवल दुबई के लिए बल्कि दुनियाभर के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए भी एक संदर्भ मॉडल बन गया है। हालांकि, पर्यावरण संरक्षणवादी विलवणीकरण की पर्यावरणीय लागत को लेकर चिंतित हैं।