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डच वैज्ञानिकों ने मूत्र से बिजली और पोषक तत्व निकालने का तरीका खोजा
नीदरलैंड के एक कार्यालय में वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रणाली विकसित की है जो मानव मूत्र से बिजली, उर्वरक और संभवतः हाइड्रोजन गैस का उत्पादन करती है। यह तकनीक जैव-विद्युत रासायनिक प्रक्रिया पर आधारित है।
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डच वैज्ञानिकों ने कार्यालय में स्थापित एक विशेष मूत्रालय के माध्यम से मानव मूत्र को ऊर्जा स्रोत में परिवर्तित करने का तरीका खोजा है। इस प्रणाली के जरिए फॉस्फेट और अमोनिया जैसे महत्वपूर्ण पदार्थों को अलग किया जा रहा है, जबकि साथ ही विद्युत उत्पादन भी किया जा रहा है। उत्पादित विद्युत को इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने में उपयोग किया जा सकता है।
इस तकनीक में जैविक बैक्टीरिया मूत्र में मौजूद जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं और इलेक्ट्रॉनों को विद्युत अग्रों तक स्थानांतरित करते हैं, जिससे विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया को जैव-विद्युत रासायनिक उपचार प्रणाली कहा जाता है, जिसमें अलग से एकत्रित किए गए मूत्र का उपयोग किया जाता है।
शोध से संकेत मिलता है कि मानव मूत्र न केवल उर्वरक के लिए एक मूल्यवान स्रोत है, बल्कि हाइड्रोजन गैस के उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह खोज नवीकरणीय ऊर्जा और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस तरह की प्रणालियों के विस्तार से आने वाले समय में अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन दोनों में सुधार आ सकता है।