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युवा भारतीयों में हड्डियों की कमजोरी का खतरा बढ़ रहा है
गतिहीन जीवनशैली और विटामिन डी की कमी से भारत के युवा वयस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ गया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर अभी से सावधानी जरूरी है।
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भारत में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है। युवा वयस्कों में हड्डियों की कमजोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली, पोषण की कमी और शारीरिक गतिविधि में कमी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।
लंबे समय तक बैठे रहना, स्क्रीन के आगे अधिक समय बिताना और धूप में कम निकलना युवाओं में विटामिन डी की कमी का मुख्य कारण बन गया है। अस्वास्थ्यकर आहार, कैल्शियम और प्रोटीन की अपर्याप्त खपत भी हड्डियों को नुकसान पहुंचा रही है। इन सभी कारकों का मिलकर युवा आबादी की हड्डियों की घनत्व को कम कर रहा है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि थकान, बार-बार दर्द, खासकर कमर और घुटनों में, और असामान्य कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ युवाओं को कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाने, नियमित व्यायाम करने और धूप में समय बिताने की सलाह देते हैं।
सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थान युवाओं में हड्डियों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और सूर्य के प्रकाश के नियमित संपर्क को अपनाकर युवा अपनी हड्डियों को मजबूत रख सकते हैं।