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चुनाव आयोग का टीएमसी प्रतीक फ्रीज करने का फैसला; बनर्जी ने तानाशाही का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल की उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'फूल और घास' प्रतीक को잠्त कर दिया है। विपक्ष के नेता रितबरता बनर्जी ने इस आदेश को लोकतंत्र के विरुद्ध बताया।
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भारतीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की आसन्न उपचुनावों के लिए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनावी प्रतीक को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। यह कदम पार्टी के भीतर विभाजन के कारण उठाया गया है, जहां दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने चुनाव लड़ने का दावा किया है।
चुनाव आयोग के इस निर्णय के विरोध में विपक्ष के नेता रितबरता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि "लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई स्थान नहीं है।" बनर्जी का मानना है कि यह निर्णय राजनीतिक दलों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को वैकल्पिक नाम और प्रतीकों की सूची प्रस्तुत करनी होगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई है कि आसन्न उपचुनाव में मतदाताओं को स्पष्ट और भ्रम-मुक्त विकल्प प्राप्त हों।
यह घटना भारतीय राजनीति में चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के आंतरिक विभाजन के मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है। तृणमूल कांग्रेस का यह आंतरिक संघर्ष बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है।