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ईरान संकट के बीच ECB ने ब्याज दरें बढ़ाईं, मुद्रास्फीति चिंता बरकरार
यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए अपनी नीतिगत दरें 2.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.50 प्रतिशत कर दी है। बैंक का अनुमान है कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति अपने 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर ही रहेगी।
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यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) ने मुद्रास्फीति के दबाव को संभालने के लिए मुद्रा नीति को कठोर बनाने का निर्णय लिया है। बैंक की नीतिगत दर को 2.25 प्रतिशत से 2.50 प्रतिशत तक उन्नत किया गया है। यह कदम यूरोजोन में कीमतों में वृद्धि की व्यापक चिंताओं के बीच आया है।
ECB ने अपने निर्णय में कहा है कि मुद्रास्फीति दर अगले कुछ समय के लिए बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी रहने की संभावना है। यह स्थिति वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से प्रेरित है, जो मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति से जुड़ी है।
ईंधन की बढ़ती कीमतें यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता बन गई हैं। ऊर्जा लागत में वृद्धि से समग्र मुद्रास्फीति दर में और अधिक दबाव पड़ने का अनुमान है। ब्याज दरों में यह वृद्धि उपभोक्ता और व्यवसायिक उधार को महंगा बना देगी।
ECB का यह निर्णय यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता लाने की कोशिश को दर्शाता है। दर वृद्धि से एक ओर तो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन दूसरी ओर यह आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में ECB की नीति में और भी परिवर्तन हो सकते हैं।