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समुद्री घास को बचाने में इको-मूरिंग्स ने किया चमत्कार, 94% नुकसान में कमी
इंग्लैंड के स्टडलैंड बे में पर्यावरण अनुकूल मूरिंग सिस्टम ने समुद्री घास को नष्ट होने से बचाया है। परंपरागत नाव एंकरों की जगह लेने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।
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इंग्लैंड के स्टडलैंड बे में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सफलता मिली है। यहां पारंपरिक नाव एंकरों को पर्यावरण अनुकूल इको-मूरिंग्स से बदलने के बाद समुद्री घास की क्षति में नाटकीय कमी आई है। 2021 से 2025 के बीच एक परीक्षण क्षेत्र में नंगी जमीन के दाग 94 प्रतिशत तक सिकुड़ गए हैं।
वर्षों तक परंपरागत एंकरों के कारण समुद्री घास को भारी नुकसान हो रहा था। इको-मूरिंग सिस्टम नावों को सुरक्षित रखता है लेकिन समुद्री तल पर घास को नुकसान नहीं पहुंचाता। इस पद्धति को अपनाने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को पुनरुद्धार का अवसर मिला है।
स्वयंसेवी गोताखोरों की रिपोर्ट से पता चलता है कि इस क्षेत्र में समुद्री घोड़ों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके अलावा ईल, केकड़े और अन्य समुद्री जीवों की संख्या भी बढ़ी है। यह संकेत देता है कि समुद्री घास के संरक्षण से पूरी समुद्री खाद्य श्रृंखला को लाभ मिल रहा है।
इस प्रकल्प की सफलता दर्शाती है कि सही तरीकों से पर्यावरण संरक्षण और मानवीय गतिविधियों में संतुलन संभव है। समुद्री संरक्षण के लिए ऐसे नवीन और व्यावहारिक समाधान भविष्य की राह दिखाते हैं।