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17 साल के अध्ययन के बाद भी झील में ट्राउट मछलियों की संख्या आधी रह गई
कनाडा के ओंटारियो में एक दशकों पुराने प्रयोग में वैज्ञानिकों ने पाया कि अम्लीय वर्षा के प्रभाव से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की रासायनिक सफाई के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता। झील की जलीय स्थिति में सुधार आने के बाद भी मछलियों की आबादी अपने पूर्व स्तर से आधी रह गई है।
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ओंटारियो की झील 223 पर किए गए 17 वर्षीय अध्ययन से पर्यावरणविदों को एक महत्वपूर्ण सबक मिला है। इस ऐतिहासिक अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने अम्लीय वर्षा के कारण होने वाले प्रदूषण का अध्ययन किया और पाया कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र केवल रासायनिक संतुलन बहाल करने से ठीक नहीं होता।
प्रयोग समाप्त होने के बाद झील का जल रसायन विज्ञान सामान्य स्तर पर लौट आया। हालांकि, मछलियों की संख्या विशेषकर ट्राउट की जनसंख्या अपने पूर्वकालीन स्तर का आधा ही रह गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मछलियों की वृद्धि दर भी निम्न बनी हुई है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के धीमे पुनरुद्धार का संकेत देती है।
यह अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है कि पर्यावरणीय क्षति से उबरना केवल प्रदूषकों को हटाने तक सीमित नहीं है। सच्ची पारिस्थितिकीय चिकित्सा में जलीय जीवन और उसके संपूर्ण ढांचे का पुनर्स्थापन शामिल है, जिसमें दशकों का समय लग सकता है।
यह खोज भारत सहित एशिया के देशों के लिए भी प्रासंगिक है, जहां औद्योगिक प्रदूषण और अम्लीय वर्षा एक बढ़ती हुई समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन से मिले निष्कर्ष पर्यावरण संरक्षण की रणनीति को लंबे समय की दृष्टि से देखने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।