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1981 में हो सकते थे आर्थिक सुधार, राजाजी के समय नहीं: चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि 1981 से पहले पूंजीवादी देश खुली अर्थव्यवस्था का समर्थन करते थे, लेकिन नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की कमी के कारण गरीब और मध्यम आय वाले देश ऐसा नहीं कर सकते थे।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत के आर्थिक सुधार 1981 में ही शुरू हो सकते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजाजी के कार्यकाल के दौरान यह संभव नहीं था। चिदंबरम के मुताबिक, 1991 के सुधारों की नींव पहले ही रखी जा सकती थी यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल होतीं।
चिदंबरम ने इंगित किया कि 1981 से पहले के दशकों में विकसित और पूंजीवादी देश सार्वजनिक रूप से एक खुली बाजार अर्थव्यवस्था का समर्थन करते दिख रहे थे। हालांकि, वास्तविकता यह थी कि एक नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की अनुपस्थिति में विकासशील देशों के लिए ऐसी नीतियां अपनाना संभव नहीं था।
पूर्व मंत्री के अनुसार, विकसित राष्ट्रों ने अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए विभिन्न संरक्षणवादी उपायों का सहारा लिया, जबकि विकासशील देशों को मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था अपनाने के लिए दबाव डाला जाता था। यह विषमता 1980 के दशक तक जारी रही।
चिदंबरम ने यह भी कहा कि 1991 के सुधार भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थे, जिन्होंने देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत किया। उन्होंने माना कि यद्यपि ये सुधार पहले आ सकते थे, लेकिन उस समय की भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां इसे संभव नहीं बनाती थीं।