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आर्थिक संतुलन के लिए बाजार और कर सुधार जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार-संचालित कीमतें और कर सुधार मौद्रिक नीति को मजबूत कर सकते हैं। साथ ही, ये विदेशी पूंजी आकर्षित करने में भी सहायक साबित हो सकते हैं।

LSN India · 19 October 2026

आर्थिक संतुलन के लिए बाजार और कर सुधार जरूरी

आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार को कीमत निर्धारण और कराधान में बुनियादी सुधार करने होंगे। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण तंत्र अर्थव्यवस्था के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में केंद्रीय बैंक की क्षमता को बढ़ाता है।

कर प्रणाली में सुधार से न केवल राजस्व संग्रहण में सुधार होगा, बल्कि विनिवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा। जब कराधान अधिक पारदर्शी और कुशल होता है, तो विदेशी निवेशकों को अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ता है। यह दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है।

मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता काफी हद तक बाजार संरचना पर निर्भर करती है। जब कीमतें स्वतंत्र रूप से निर्धारित होती हैं, तो ब्याज दर परिवर्तन अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रतिबिंबित होते हैं। इससे मुद्रा प्रबंधन अधिक प्रभावी बनता है।

भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ये सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। विश्वव्यापी पूंजी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, और निवेशक ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को पसंद करते हैं जहां नियम स्पष्ट, पारदर्शी और बाजार-अनुकूल हों। नीति निर्माताओं को इस चुनौती को गंभीरता से लेना होगा।