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शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका नहीं, समाज सेवा है: भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य व्यक्तिगत सफलता से कहीं बड़ा है। उन्होंने समाज में ऐसे नागरिकों की आवश्यकता पर बल दिया जो सामूहिक कल्याण के लिए कार्य करें।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शिक्षा के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक सुरक्षा या रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि इससे कहीं अधिक व्यापक होना चाहिए।
भागवत के अनुसार, आज के समाज को उन व्यक्तियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो अपने निजी हितों को पीछे रखकर सामाजिक कल्याण के लिए कार्य करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सार्थक मानव बनना, केवल सफल होने से अधिक महत्वपूर्ण है।
उनके विचार में शिक्षा को व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करना चाहिए। भागवत का मानना है कि जब नागरिक समाज और सामूहिक लक्ष्यों के प्रति समर्पित होते हैं, तो राष्ट्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस संदेश में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक व्यापक चिंतन की आवश्यकता को दर्शाया गया है, जहां ज्ञान के साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों का भी विकास किया जाए।