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दो साल की कठिन यात्रा के बाद घर लौटा रोहतक का 8 वर्षीय बालक
रोहतक के पीजीआईएमएस में 23 महीने तक गहन चिकित्सा विभाग में भर्ती रहने के बाद एक बालक को स्थिर स्वास्थ्य के साथ घर भेज दिया गया है। इस दौरान उसके माता-पिता की समर्पण और चिकित्सा दल की निरंतर देखभाल की कहानी परिवार के अदम्य साहस का प्रतीक है।
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रोहतक स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीजीआईएमएस) में 23 महीने की लंबी और कठिन चिकित्सा यात्रा के बाद आठ वर्षीय एक बालक को घर भेज दिया गया है। मेडिकल टीम ने घोषणा की है कि बालक अब स्थिर स्वास्थ्य स्थिति में है।
बालक को पांच अक्टूबर 2024 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस पूरी अवधि में उसकी माता उसके सिरहाने पास बैठी रहीं, जबकि उसके पिता ने अपनी आजीविका के साधन यानी टैक्सी चलाना छोड़ दिया और अस्पताल में रहकर पूर्णकालीन रूप से पुत्र की सेवा-सुश्रुषा की।
दो साल की इस यात्रा में चिकित्सा दल की सेवा और माता-पिता का समर्पण बालक के जीवन को बचाने का कारण बना। पीआईसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने भी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए और उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चिकित्सकों की निरंतर निगरानी और प्रयासों के कारण बालक की स्वास्थ्य स्थिति में क्रमिक सुधार हुआ। परिवार के अपार धैर्य और चिकित्सा विशेषज्ञों की दक्षता की यह कहानी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है।