LSN News › India

World · India Bureau

एकादशी श्राद्ध आज: पिंडदान-तर्पण की शुद्ध विधि और मुहूर्त

पितृपक्ष के दौरान एकादशी तिथि को श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन उन पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण की परंपरागत विधि का पालन किया जाता है।

LSN India · 5 October 2026

एकादशी श्राद्ध आज: पिंडदान-तर्पण की शुद्ध विधि और मुहूर्त

पितृपक्ष के दौरान एकादशी श्राद्ध को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह श्राद्ध विशेषकर उन पितरों के लिए संपन्न किया जाता है, जिनका देहांत किसी भी माह की शुक्ल या कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को हुआ हो। हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार, इसी दिन पिंडदान और तर्पण से पितरों को मुक्ति मिलती है।

पारंपरिक विधि के अनुसार, एकादशी श्राद्ध में गंगा या किसी पवित्र जल स्रोत के किनारे पिंडदान किया जाता है। पूजा के समय घी, चावल, तिल और जौ से बने पिंड का प्रयोग होता है। तर्पण के दौरान जल में तिल मिलाकर पितरों को समर्पित किया जाता है। इस विधि को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद संपन्न करना अधिक शुभ माना जाता है।

एकादशी श्राद्ध के दिन इंदिरा एकादशी का व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत को रखने वाले व्यक्तियों का मानना है कि इससे परिवार के पितरों को स्वर्ग में शांति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया श्राद्ध अन्य दिनों के श्राद्ध से अधिक फलदायी होता है।