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यूरोप की चरम गर्मी और जंगल की आग में एल नीनो की भूमिका
यूरोप में इस गर्मी के मौसम में आने वाली चरम तापमान और भीषण आग की घटनाओं के पीछे एल नीनो जलवायु प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका देखी जा रही है। बेल्जियम में हाल ही में भड़की आग ने व्यापक तबाही मचाई है।
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यूरोप में इस वर्ष असामान्य तापमान वृद्धि और वनाग्नि की घटनाएं देखी जा रही हैं, जिनका सीधा संबंध वैश्विक जलवायु पैटर्न से जुड़ा है। प्रशांत महासागर के ऊपर विकसित होने वाली एल नीनो प्रणाली महाद्वीप के मौसम में उल्लेखनीय परिवर्तन ला रही है। यह प्राकृतिक जलवायु चक्र यूरोपीय क्षेत्र में असमान्य रूप से उच्च तापमान लाने में प्रमुख कारक साबित हो रहा है।
बेल्जियम में हाल में भड़की वनाग्नि इसी पृष्ठभूमि में सामने आई है। यह आग असाधारण गर्मी की लहर के दौरान फैली, जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 डिग्री फारेनहाइट) तक पहुंच गया था। आग ने क्षेत्र के पीटलैंड और पाइन वन को अपनी चपेट में ले लिया, लगभग 3,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नष्ट कर दिया।
एल नीनो की मौजूदगी के समय समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक रहता है, जिससे वैश्विक मौसम प्रणालियों में बदलाव आता है। यूरोप इसी प्रभाव के तहत तीव्र गर्मी का अनुभव कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलवायु घटना वर्ष के शेष समय में भी उच्च तापमान और सूखे की स्थिति बनाए रख सकती है।
वन अग्नि की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरती जा रही है। विभिन्न देशों की कार्यनीति और संसाधन इन आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी इन घटनाओं की आवृत्ति बढ़ने से संबंधित चिंताएं भी बढ़ रही हैं।