LSN News › India

World · India Bureau

एल नीनो फरवरी 2027 तक बना रहेगा: भारत पर क्या होगा असर

विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में मौजूदा एल नीनो की स्थिति अगले महीनों में तीव्र हो सकती है और फरवरी 2027 तक जारी रह सकती है। इससे वर्षा, तापमान और चरम मौसमी घटनाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

LSN India · 4 September 2026

एल नीनो फरवरी 2027 तक बना रहेगा: भारत पर क्या होगा असर

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने गुरुवार को जारी बयान में कहा है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में व्याप्त एल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में अत्यंत तीव्र हो सकती है और फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है। डब्ल्यूएमओ के महासचिव सेलेस्ट साउलो ने कहा कि यह जलवायु घटना दुनिया भर के समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने आगाह किया कि सूखे और बाढ़ से होने वाली तबाही पहले ही दिख रही है और एल नीनो के तीव्र होने से इसके प्रभाव और बढ़ने की संभावना है।

डब्ल्यूएमओ के इस पूर्वानुमान से कुछ दिन पहले भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने भी सितंबर के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा था कि एल नीनो की स्थिति अगले साल फरवरी तक बनी रह सकती है। यह जलवायु घटना वर्षा और तापमान के पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे बाढ़, सूखा और चरम गर्मी जैसे जोखिमों में वृद्धि हो सकती है।

एल नीनो, एल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की तीन अवस्थाओं में से एक है, जो एक प्रमुख जलवायु घटना है। यह घटना वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग परिणाम दे सकती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देशों के लिए एल नीनो की तीव्रता मानसून और फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।