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एल नीनो और उत्तरपूर्वी मानसून: तमिलनाडु के लिए क्या है आगे?
इस साल एल नीनो के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा में कमी देखी गई है, जिसका असर तमिलनाडु पर भी पड़ा है। अब उत्तरपूर्वी मानसून के मौसम में राज्य को सामान्य बारिश की उम्मीद है।
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इस वर्ष की मौसमी स्थितियां तमिलनाडु के लिए विशेष महत्व रखती हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो प्रभाव के कारण राज्य को सामान्य से कम वर्षा मिली है। यह वैश्विक जलवायु पैटर्न भारतीय उपमहाद्वेश में मानसून की गतिविधियों को प्रभावित करता है और फसल उत्पादन से लेकर जल संसाधनों तक के लिए महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों के अनुसार, एल नीनो की मजबूत स्थिति इस साल पूरे भारत में असामान्य वर्षा पैटर्न लाई है।
हालांकि, तमिलनाडु के लिए अच्छी खबर यह है कि उत्तरपूर्वी मानसून आमतौर पर इस क्षेत्र के लिए प्रमुख वर्षा का स्रोत है। अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाले इस मानसून मौसम में राज्य को सर्दियों की अधिकांश बारिश मिलती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवधि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान आई कमी को पूरा करने का अवसर प्रदान कर सकती है।
तमिलनाडु की कृषि और जल आपूर्ति प्रणाली मानसून पर निर्भर करती है। राज्य के जलाशयों और नहरों की स्थिति वर्षा के पैटर्न से सीधे जुड़ी होती है। अगले महीनों में वर्षा का आकलन करना कृषि योजना और जल प्रबंधन के लिए आवश्यक है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर ध्यान देना राज्य के नीति निर्माताओं और किसानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।