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화려क गणेश प्रतिमा विसर्जन से शहर में अराजकता
गणेश चतुर्थी के दौरान화려क प्रतिमाओं के विसर्जन से शहरों में प्रदूषण और अव्यवस्था की समस्या बढ़ रही है। जलाशयों में जमा कचरा और यातायात बाधा स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बन गई है।
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गणेश चतुर्थी के उत्सव के दौरान भव्य और महंगी प्रतिमाओं के विसर्जन से शहरों में बड़ी व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो रही है। रंग-बिरंगी और सोने-चांदी से सजी प्रतिमाएं जलाशयों में डाली जाने से पर्यावरण प्रभावित हो रहा है और जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं।
विसर्जन जुलूसों के दौरान सड़कों पर भीड़ और यातायात व्यवस्था में गड़बड़ी देखी जा रही है। शहर के मुख्य इलाकों में जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम नागरिकों को परिवहन में कठिनाई होती है। पुलिस और प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने में भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
जलाशयों और तालाबों में विसर्जन के बाद सफाई का काम भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। प्रतिमाओं के अवशेष और अन्य कचरे को निकालना स्थानीय अधिकारियों के लिए समय और संसाधन की बड़ी खपत करता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसी परंपरा को टिकाऊ तरीके से मनाने की आवश्यकता है।
अधिकारियों ने मिट्टी की प्रतिमाओं के प्रयोग और पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन प्रक्रिया को बढ़ावा देने का प्रयास किया है, परंतु भव्य प्रतिमाओं की परंपरा अभी भी प्रचलित है।